Chandigarh Airport Controversy and its conclusion!

rsdhull राजनैतिक विश्लेष्ण Leave a Comment

चंडीगढ़ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का मामला आजकल सुर्ख़ियों में है. इसका कारण है पंजाब सरकार द्वारा की जा रही दबंगई. ज्ञातव्य है कि इस हवाई अड्डे के लिए हरियाणा सरकार ने 2007 में 200 करोड़ रूपये दिए गये थे. उस समय की कांग्रेस सरकार का कहना था कि ये एयरपोर्ट दोनों राज्यों की सांझी धरोहर है. मीडिया में आई रिपोर्ट्स के अनुसार इसका नाम शहीद ए आजम भगत सिंह के नाम पर रखना तय हुआ था और कागजों पर सहमती बन गयी थी. हालांकि यह बात साबित करने का कोई पुख्ता आधार इस समय पर उपलब्ध नहीं है. सूचना के अधिकार के इस्तेमाल से ही यह साबित किया जा सकता है. 2014 में सरकार बदलने के बाद हरियाणा सरकार ने इसका नाम डाक्टर मंगलसेन के नाम पर रखने की अनुशंसा की. पर विपक्ष के पुरजोर विरोध के कारण इसे टाल दिया गया और हरियाणा सरकार ने भी अंततः इसके लिए सहमती जता दी कि नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर ही होगा. पर जब इसके उद्घाटन का समय आया तो इस समय पंजाब में चुनाव का माहौल है. इस हवाई अड्डे को मोहाली अतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम देकर पंजाब सरकार वाहवाही लूट रही है. हरियाणा सरकार के द्वारा कोई पुख्ता विरोध नहीं किया गया. मुख्यमंत्री के द्वारा एक विरोध स्वरुप चिट्ठी लिखने के सिवा कुछ नहीं किया गया. प्रेस कोंफ्रेंस में और उद्घाटन में हरियाणा के मुख्यमंत्री नहीं गये. पर उन्होंने राव नरवीर सिंह (मंत्री) को वहां भेज दिया. मीडिया को चिट्ठी लीक कर दी गयी और मैसेज दिया गया कि हमने बायकाट कर दिया है. यदि बायकाट की नीति थी तो मंत्री को क्यों भेजा? क्या चिट्ठी लिखने मात्र से मामला सुलझ गया. हरियाणा सरकार की जायज मांग है कि क्योंकि सरकार ने बराबर पैसे दिए हैं और यह सांझा प्रोजेक्ट है तो इसका नाम सांझा होना चाहिए न कि मोहाली के नाम पर जो पंजाब का जिला है.

अब आते हैं आगे. एक प्रश्न के उत्तर में माननीय नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला जी ने कहा कि चिट्ठी बादल सरकार को नहीं हुड्डा साब को लिखनी चाहिए और उनसे पूछना चाहिए कि उन्होंने पैसे दिए ही क्यों? जब पंजाब की जमीन पर यह बना है तो पंजाब तो नाम रखेगा ही. कैसे रोकोगे उन्हें. इसका जवाब भाजपा कुछ इस तरह देती है कि यह केंद्र की जमीन पर बना है अतः नाम केंद्र सरकार रखेगी. अब कोई भाजपा से पूछे कि यदि नाम केंद्र ने रखना है तो आप पत्र लिखिए केंद्र सरकार को कि नाम शहीद ए आजम के नाम पर रखो. पर ऐसा कुछ हरियाणा सरकार ने किया नहीं. तो अब उनपर सवाल उठना लाजमी ही तो है. अब आते हैं अभय जी की स्टेटमेंट पर तो उसके विरोध में भूतपूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने स्टेटमेंट दी कि इनेलो को हरियाणा की जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए. चंडीगढ़ हमारा है. अब कोई उनसे पूछे कि इस स्टेटमेंट में चंडीगढ़ की बात कहाँ आई? अब आपने एयरपोर्ट चंडीगढ़ में नहीं मोहाली में बनवाया. इसका मुख्य गेट मोहाली में है. चंडीगढ़ से मोहाली जाकर ही यहाँ पंहुच सकते हैं. कोई उनसे पूछे कि क्या वे इस प्रकार पैसे को हरियाणा में ही कोई एअरपोर्ट बनवाने में नहीं खर्च कर सकते थे. करनाल और हिसार में तो हवाई पट्टी भी है. दोनों मुख्य केंद्र हैं; कहीं भी बना सकते थे. क्या इस एयरपोर्ट को हरियाणा के लोगों के लिये बंद कर देते यदि यह पैसे न दिए होते? इसका फायदा हरियाणा को कैसे हुआ इसका जवाब हुड्डा साब को हरियाणा की जनता को देना चाहिए. साथ ही भाजपा बताये कि इसका नामकरण कब कर रही सरकार. हुड्डा साब ने इतना पैसे देते हुए यह भी लिखित रूप में तय नहीं किया कि इसका नाम शहीद ए आजम पर रखा जाए? यदि नहीं किया तो विपक्ष उनसे उत्तर क्यों न मांगे? ऐसा लगता है कि हांसी बुटाना नहर पर गैर कानूनी 750 करोड़ खर्च कर के ये दो सौ करोड़ भी कुछ ऐसे ही खर्च कर दिए कांग्रेस सरकार ने. प्रश्न तो जायज है. हालांकि इनेलो की मांग अभी भी यही है कि इसका नामकरण शहीद भगत सिंह के नाम पर करवाए सरकार.

पर भाजपा इस मुद्दे को खींच कर रखना चाहती है ताकि पंजाब में वह राजनैतिक फायदा उठा पाए. ऊपर से कांग्रेस अपने गलत काम के लिए हमें माफ़ी मांगने के लिए कह रही है. क्या हुड्डा साब को पंचकुला बिलकुल याद नहीं आया विकास के समय? दस वर्ष में मोहाली कहाँ से कहाँ चला गया वहीँ पंचकुला वहीँ खड़ा है विकास के मामले में? फिर भी राजनीति कर रहे हैं?

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