Haryana Riots Case Update dated 22.09.2016

rsdhull निजी विचार Leave a Comment

कथित मुरथल मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने स्वयम संज्ञान लेकर सुनवाई प्रारंभ की थी. यह मामला ट्रिब्यून अखबार की एक झूठी खबर से उपजा हुआ है जिसपर सभी लोग समेत न्यायमित्र अपने अपने स्तर पर राजनीति कर रहे हैं. जहाँ इनेलो इस मामले को संसद लेकर गयी और मांग की गयी कि उन मीडिया समूहों के खिलाफ कार्यवाही की जाए जो इस प्रकार के झूठे मामलों को शय दे रहे हैं तो दूसरी ओर इस मुद्दे पर कांग्रेस की तरफ से सरकार को घेरा गया. कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने लगभग सभी डिबेट्स में इस मामले पर सरकार को यह कहकर घेरा है कि डेढ़-दोसौ महिलाओं के साथ में बदतमीजी हुई है. इस मामले में बाद में हरियाणा के सभी मामले आकर जुड़ गये. जहाँ एक और हाईकोर्ट ने मोनिटरिंग कमिटी का गठन कर दिया तो दूसरी ओर एक आर्डर में हरियाणा में दर्ज सभी मामलों को मोनिटर करने की बात कही. पिछले विधानसभा सत्र से पहले सरकार हरियाणा के दंगों की जांच सीबीआई से करवाने से बच रही थी; पर सत्र के दौरान सरकार फंसी. जहाँ हरियाणा के वित्त मंत्री की कोठी के जलने का मामला सरकार सीबीआई को देने के लिए तत्पर दिखी तो वहीँ विपक्ष का प्रश्न जायज था कि केवल एक मामला क्यों? जब साजिश चारों और से हुई है तो एक मामला सीबीआई को देना सरकार की मंशा को दिखाता है कि सरकार लिमिटेड कार्यवाही करना चाहती है. सरकार अभी तक सीबीआई को यह मामला देने से बच रही थी कि मुरथल मामले की सुनवाई के दौरान कल एक जबरदस्त डेवलपमेंट हुई. CWP-3897-2016 में CM-12040 of 2016 फ़ाइल करते हुए हरियाणा के वित्त मंत्री के भाई ने कहा कि उनके रोहतक स्थित स्कूल में आगजनी की FIR नम्बर 84 dated 25.02.2016 में कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. यह भी कहा गया कि सरकार एक जातिविशेष के वोटबैंक को साध रही है और जाटों के दबाव में आकर सरकार कार्यवाही नहीं कर रही है. ये बेहद अजीब और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दर्शाता है क्योंकि जाटों का स्पष्ट आरोप है कि सरकार एक दो नेताओं के दबाव में आकर हरियाणा में जाटों को सामाजिक रूप से अलग थलग करने में जुटी है जिसका खामियाजा समस्त समाज को भुगतना पड़ रहा है. इसमें कोई दो राय नहीं कि हिंसा का समर्थन किसी हाल में नहीं किया जा सकता है पर इसका मतलब ये नहीं कि निर्दोषों को भी घेरा जाए. जिन लोगों का इस हिंसा में कोई हाथ नहीं था उनका क्या? हैरानी और बढ़ जाती है जब इस प्रकार की याचिका नहीं लगती है कि एक सासंद अभी भी जातिविशेष को बदनाम करने में लगा हुआ है. क्या संगठन के स्तर पर कोई कार्यवाही भाजपा के द्वारा की गयी है जो हम यह मानने पर मजबूर हो जाएँ कि सरकार जाटों के दबाव में नहीं जाटों को अलग थलग करने के प्रयास में संलिप्त है. उन्हें यह भी बताना चाहिए था कि गुजरात में निर्दोषों के खिलाफ बने सभी केस वापिस ले लिए गये हैं वहीँ दूसरी ओर हरियाणा सरकार ने अगस्त 16 की अपनी समय सीमा भी पार कर दी है पर हजारों लोग जेलों में सड़ रहे हैं. जो सच में दोषी हैं उनके खिलाफ सरकार कार्यवाही करे. पर ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो गलत प्रकार से नामजद किये गये हैं. जैसे रोहतक का एक नवयुवक वित्त मंत्री की कोठी वाले मामले में जेल के अंदर है जबकि वह उस दिन PGI में खून दान करने गया था और अगले दिन हुई आगजनी के समय तो उसकी फोन की लोकेशन तक रोहतक से बाहर की थी. गिनी चुनी बातों और गिने चुने मामले पर अपना पक्ष रखना अन्याय के बराबर है और इस अन्याय पर वित्त मंत्री को अपना ब्यान देकर साफ़ करना चाहिए कि क्या वे अपने भाई की बात की अनुशंसा करते हैं अथवा विरोध! यदि अनुशंसा करते हैं तो वे बताएं कि उनकी पार्टी के उन नेताओं के विरुद्ध क्या कार्यवाही होगी जो लगातार जातिविशेष के विरुद्ध बोल रहे हैं और यदि वे विरोध करते हैं तो उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि पहले से पीड़ा झेल रहे जाट समाज की पीड़ा बढ़ाने का कार्य उनके परिवार की तरफ से क्यों किया गया? ध्यान रहे मैं यह सब लिखते हुए उनकी कोठी में हुई किसी भी हिंसा का समर्थन नहीं कर रहा हूँ; पर उत्तर अवश्य मांग रहा हूँ कि यह मामला उनके होते हुए यहाँ तक पंहुचा कैसे? उनकी कोठी में जिन लोगों ने असली में आगजनी की है उनको सजा मिले पर इन बातों का स्पष्टीकरण जनता उनसे चाहती है; आशा है वे बतायेंगे.

कोर्ट ने मामले को 24 सितम्बर के लिए आगे भेज दिया है. इसपर सरकार को फैंसला करना है कि क्या सरकार कथित मुरथल केस को छोड़ सभी मामलों को सीबीआई को सौंपने का कार्य करेगी या नहीं? मुरथल में अभी FSL की रिपोर्ट बाकी है अतः इसका फैंसला अभी नहीं लिया गया है.

इस मामले का पूरा आर्डर पढ़ें: डाउनलोड

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