Letter to Tribune Editor in Chief Regarding Alleged Murthal Case

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आदरणीय खरे साब,

ईमेल:editorinchief@tribuneindia.com
आपके अखबार को यह प्रथम पत्र मैं ऐसे बिलकुल नहीं लिखना चाहता था पर आपने अंततः मजबूर कर दिया. हर बार की तारिख की तरह इस बार भी कथित मुरथल गैंग रेप केस की तारिख के बाद आपकी अगले दिन की खबर न केवल गलत तथ्यों को प्रस्तुत करती है परन्तु दुर्भाग्यवश जानबूझ कर अपने अख़बार की इज्जत बचाने का एक प्रयास मात्र नजर आती है. आपका अखबार कल की तारिख के बारे में लिखता है कि SIT ने माना कि बलात्कार हुए. क्या मैं पूछ सकता हूँ कि कब माना? क्या अखबार इस तथ्य को छिपाना चाहता है कि दो तीन नवयुवक जो एक आगजनी के मामले में कथित रूप से आरोपी हैं उनसे डिस्क्लोजर में पुलिस ने लिखवाया है कि वे किसी कथित बलात्कार के मामले में सम्मिलित थे. फिर आपका अखबार यह बात छिपाना चाहता है कि जिस डीएनए रिपोर्ट की आप बात कर रहे हैं उनके लिए उन नवयुवकों ने खुद कंसेंट दी है जबकि कानूनी रूप से वे इसके लिए बाध्य नहीं हैं. इसका स्पष्ट मतलब आप समझें तो यह निकलता है कि वे आरोपी जानते हैं कि वे इस मामले में दोषी नहीं पर जैसा कि आप पुलिस सिस्टम को समझते हैं कि वहां पर ऐसे कोई डिस्क्लोजर लिखवाना कितना आसान होता है तो क्या आप इन डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के लिए उन्हें फांसी पर टांगने के लिए तैयार हैं. आप का अखबार यह भी जानता है कि यह मामला हरियाणा में एक समुदाय के लिए इज्जत व मान का सवाल भी बना हुआ है अतः हर एक कार्यवाही पर लाखों लोगों की नजर रहती है. यदि कल को डीएनए रिपोर्ट नवयुवकों के पक्ष में आई तो क्या आप बता सकते हैं कि आप उनकी खोई इज्जत को वापिस कैसे लायेंगे? मैं समझ नहीं पाता कि आपका अखबार हर उस कार्यवाही को भी कैसे लिख देता है अखबार में जो कभी कोर्ट में घटित ही नहीं हुई होतीं. मैं यह भी नहीं समझ पाता कि आपका अखबार हर उस स्टेटमेंट को अपनी मर्जी से कैसे उपयोग करता है जो कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान किसी और सन्दर्भ में कही गयी होती हैं. मेरी इस मामले में SIT की जांच अथवा माननीय अदालत की कार्यवाही बाधित करने की कोई मंशा नहीं है पर भारत का नागरिक होने के नाते मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि आप दुर्भाग्यपूर्ण रूप से तथ्यों को बदलकर क्या साबित करने में लगे हैं? क्या कभी पुराने जमाने में पंजाब और हरियाणा की पत्रकारिता की शान समझे जाने वाला ट्रिब्यून आगे निष्पक्ष पत्रकारिता करेगा?
आपकी जानकारी के लिए माननीय उच्च न्यायालय का 22.09.2016 का ऑर्डर साथ अटैच कर रहा हूँ ताकि आप उसमें पढ़ लें कि SIT ने आपके कहे अनुसार ऐसा कुछ माना भी है या नहीं?
Order Download: Here
एक आम याची,
रविन्द्र सिंह ढुल
अधिवक्ता
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़

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