आज सम्मान व सद्भावना दिवस में आये सभी बुजुर्गों, युवाओं और माताओं को धन्यवाद

rsdhull निजी विचार, राजनैतिक विश्लेष्ण Leave a Comment

प्रदेश के कोने कोने से लाखों की संख्या में स्व जननायक ताऊ देवीलाल जी के 103वें जन्मदिवस पर आज यहां करनाल में आयोजित सद्दभावना सम्मान दिवस समारोह में आए सभी बुज़ुर्गों व साथियों को प्रणाम करता हूँ, चरणवन्दन करता हूँ। बुज़ुर्गों व साथियों, आज यहां करनाल में हम सब देश में विकास की सोशल इंजीनियरिंग के जनक स्व जननायक ताऊ देवीलाल जी के 103वें जन्मदिवस के साथ-साथ सविंधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर जी का 125वा जन्मदिवस  प्रदेश में सद्धभावना सम्मान दिवस के रूप में मनाने को एक झण्डे के नीचे एकत्रित हुए हैं। पूरे देशभर में किसान, मज़दूर, कमेरा, दलित व पिछड़े वर्ग को एक नई पहचान देने व विकास की धारा से सीधे जोड़ने में दोनों ही का योगदान आज़ाद भारतवर्ष में सर्वदा मिसाल बनकर अमिट माना जाता रहेगा। दोनों ही नेताओं ने जीवनभर सामाजिक सद्दभाव बढ़ाने व बनाए रखने के लिए सर्वदा अग्रणी रहकर कार्य किया।

साथियों, बड़े अफ़सोस का विषय है की पिछले लगभग दो वर्षों से सत्ता के नशे में चूर हो बीजेपी की सरकार ने बिना विकास के कार्य किये वोटों को हथियाने के लिए प्रदेश में वर्षों से कायम भाईचारे को बिगाड़ने का अभूतपूर्व षड्यन्त्र रचा। इस असामाजिक देशद्रोही कार्य को अंजाम देने के लिए सरकार को कांग्रेस के कुछ सिपहसालारों का साथ भी मिला। सत्ता के गलियारों से जब विकास की गंगा की जगह द्वेष, असामाजिकता, आपसी विरोध बहने लगे तो आपका और हमारा, ताऊ और बाबा साहेब के सच्चे भगत होने के नाते फ़र्ज़ बनता है की एक झंडे के निचे इक्कट्ठे हो कर डटकर ऐसे तमाम मनसूबों को जड़ से नेस्तनाबूद कर दें अर्थात बीजेपी और कांग्रेस नाम की समाजिक दीमक को जड़ से खत्म करें।

आज हरियाणा कुछ ही दिनों में स्वर्ण जयंती मनाने जा रहा है। मगर आज के हरियाणा के हालात देखकर प्रदेश निर्माताओं को स्वर्ग में रहते हुए भी घोर पीड़ा हो रही होगी क्योंकि उनके खून, पसीने के संघर्ष से लाखों साथियों के सहयोग से बना हरियाणा आज 10 कदम आगे चलने के बजाए 20 कदम पीछे चल रहा है। पूरे देश का स्वर्णिम प्रदेश आज देशभर में असामाजिकता की मिसाल बनकर रह गया है। इसके लिए बीजेपी और कांग्रेस का किचन अलायन्स जिम्मेवार है जो की सोची समझी चाल से मेहनतकश, कमेरे, किसान, दलित और पिछड़े वर्ग को विकास से दूर करने की दिशा में प्रयासरत हैं। अपने हाथों लगाए इस प्रदेशरुपी पौधे को बर्बाद होता देख आज स्वर्ग में बैठी वह हरी पगड़ी वाले सन्त की आत्मा आज निरन्तर परेशान जरूर होगी।

बुज़ुर्गों व साथियों, जननायक चौधरी देवी लाल जी हमेशा कहा करते थे की लोक राज लोक लाज से चलता है। उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था।  मुझसे पहले आने वालों ने भी इस विषय बोला और मुझसे बाद आने वाले वक्ता भी बोलेंगे। भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दो साल इस बात के जीते जागते सबूत हैं कि राज चलाने के लिए लाज की जरूरत है। पिछले साल तक तो ये सरकार आमजन से इस बात की गालियाँ सुन रही थीं कि यह प्रदेश में विकासरुपी अमलीजामा पहनाने के लिए कुछ नहीं कर पा रही है। चुनावी वायदे और घोषणा पत्र जो था वह जुमला था। पर इस साल सरकार के इशारे पर फरवरी में जो कुछ हुआ उसे हरियाणा की जनता कभी नहीं भूल सकती। सारा हरियाणा और मेरे सामने बैठे ये लाखों की संख्या में हरियाणा के कौने कौने से आये बुजुर्ग, महिला और नौजवान जानते हैं कि ये किसने करवाया। पर यह सरकार दंभ और बेशर्मी के कारण उसे न देखना चाहती है और न सोचना चाहती है।

जहाँ एक और हरियाणा की जनता न्याय के लिए तड़प रही है वहीँ अपनी सारी लाज को छोड़ यह सरकार हरियाणा के इतिहास की सबसे नकारा सरकार चलाने में व्यस्त है। आज इन शब्दों को अपनाने की बहुत जरूरत है कि लोकराज लोकलाज से चलता है। न तो इस सरकार में लोकलाज है, क्योंकि यह होती तो अबतक इस्तीफा देकर हरियाणा में दोबारा चुनाव करवा चुके होते और न ही यह लोकलाज है क्योंकि हरियाणा की इस भोली भाली जनता को सुनने वाला कोई नहीं है। मेरे सामने बैठी हरियाणा की इस बहादुर जनता से मैं पूछना चाहता हूँ कि आपके गांव, मुहल्ले के कितने ही लोग सरकार के पास किसी जायज काम के लिए गये होंगे पर उन्हें निराश अपने घरों को लौटना पड़ा?

जब इस सरकार में आमजन के काम ही नहीं होते तो ये कैसा लोकराज है? ये राज लोकराज नहीं तानाशाहों की ऐसी सरकार है जहाँ ऊपर बैठे तानाशाह एक दूसरों की भी नहीं सुनना चाहते। हर मंत्री दुसरे मंत्री के खिलाफ बोलता है अपना पल्ला झाड़ता है और प्रदेश के मुख्यमंत्री रबड़ के बुत्त! मोदी जी कहेंगे तो चलेंगे नहीं तो प्रदेश के हित जाये भाड़ में। इस बीच पिसता है तो वह है मेहनतकश किसान, मजदूर अर्थात कमेरा। जननायक हमेशा कहा करते थे की जाति केवल दो ही होती हैं कमेरा और लूटेरा। सरकार में लूटेरे बैठे हैं और आमजन में कमेरे। कमेरे की आवाज़ को उसके सपनों को दबाने के लिए लूटेरों ने प्रदेश का भाईचारा समाप्त करने के लिए काला षड्यन्त्र रचा। जिसका हम खुलकर विरोध करते हैं। चौधरी ओमप्रकाश चौटाला जी ने हमेशा कर्म को जाति माना है। इस संसार से जाने के बाद परमात्मा ने हमसब के कर्मो से हमे परखना है जाति से नहीं।

जननायक चौधरी देवी लाल जी और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी ने जिस किसान और कमरे के लिए सारी जिन्दगी काम किया। वह पिसता है। तो कहाँ है लोकराज? कहाँ है सरकार? क्या ऐसी सरकार को एक पल भी बने रहने का हक़ है जिसने हरियाणा के भाईचारे को खत्म करने का दुस्साहस किया हो? जिसके राज में हरियाणा ने ऐसा तांडव देखा जिसकी भरपाई आने वाली पीढियां अपने खून और पसीने से भी शायद ही कर पाए। अपनी चहेती रिलाइंस, अदानी जैसी कम्पनियों को मोटे मोटे टेंडर देकर, फसल बीमा के ठेके देकर किसान को और कमेरे को तबाह किया जा रहा है। मैं करनाल की जनता से पूछता हूँ; आपने भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास जताया था। बताइए कहीं लगा कोई पत्थर? मैं यहाँ के किसानों से पूछना चाहता हूँ कि आप दुनिया की सबसे बढ़िया बासमती की फसल को पैदा करते हैं। क्या दस हजार करोड़ का धान घोटाला यहाँ नहीं हुआ? मैं हरियाणा के किसान और कमरे वर्ग से पूछना चाहता हूँ कि आखिर कब तक हम हमारे अधिकारों से वंचित रहेंगे? जिस तरह इस सरकार ने जातीय द्वेष पैदा कर हरियाणा का माहौल खराब किया उससे यह साफ़ है कि इस सरकार को अब एक दिन भी सत्ता में रहने का हक़ नहीं। कहाँ है स्वामीनाथन की रिपोर्ट जिसके लिए बीजेपी मंत्री चुनाव से पूर्व सडकों पर अपने कुरते उतार कर खड़े होते थे? वो लोग जो पीठ पीछे हरियाणा की भोली जनता की पीठ पर छुरा घोंप रहे हैं वो इमानदारी की बात करते हैं? जो किसानों की गाढ़ी कमाई को कम्पनियों को सौंप रहे हैं वो लोग इमानदारी की बात करते हैं।

इसके विपरीत ताऊ देवीलाल की नीतियों पर चलने वाली इन्डियन नेशनल लोक दल की सरकार ने विकास को गांव पर धरातल पर लाकर खड़ा किया था। किसान को ट्यूबवेल पर बिजली मिलती थी, गाँव-गाँव की सडकें बनी। चौपालें बनी। चौधरी ओमप्रकाश चौटाला जी स्वयं गांव-गांव घुमते थे। विकास के नए आयाम गड़े गये थे। बीजेपी सरकार के शिखर पुरुष श्री अटल बिहारी वाजपाई जी कभी कहते थे कि सरकार चलाना है तो चौटाला साहब से सीखो। क्या इससे बढ़िया वित्तीय स्थिति कभी हरियाणा में हुई? जो कर्जा कभी पचीस हजार करोड़ था वो आज बढाकर एक लाख इकतालीस हजार करोड़ कर दिया? न नहरों में पानी, न पीने का पानी, बिजली, न सड़कें और ये सरकार सुप्रीम कोर्ट में जाकर कहती है कि हरियाणा में सूखा नहीं है; पानी की कोई कमी नहीं है। मैं हरियाणा की जनता से आह्वाहन करता हूँ कि ऐसी भ्रष्ट, झूठी और बेईमान सरकार को उखाड़ फैंको। मैं उनसे आह्वाहन करना चाहता हूँ कि फिर से लोकराज लेकर आयें ताकि लोकलाज राजनीति में फिर से लौट सके और किसानों, कमेरों की दलित की और पिछड़े वर्ग की सरकार बने। हरियाणा फिर से एक हो।

बुज़ुर्गों और नौजवान साथियों, बीजेपी के मंत्रियों, नुमाइंदों ने पूरे प्रदेश का गौरव और अस्मिता दिल्ली दरबारों में गिरवी रख अपनी कुर्सियां बचाई थी। संयोंग से मैं जीन्द जिले से हूँ। जहां कुछ ही दिन पहले प्रदेश सरकार ने गौरव रैली का असफल आयोजन किया था। पूरे प्रदेश को आस थी की नए उद्योग स्थापित होंगे। नई घोषणाएं होंगी। मगर प्रदेश में नई योजनओं का आना तो दूर बल्कि जीन्द जिले को भी इस मायूस, नकारा, सुस्त, सरकार से कुछ नसीब नहीं हुआ। साथियों, चौधरी ओमप्रकाश चौटाला जी ने हमेशा संघर्ष कर अपने अधिकारों को छीनने की वकालत की है। वह कहते हैं की इकठ्टे होकर, आपसी बैर द्वेष भुलाकर, भाईचारे को बढ़ाते हुए संघर्ष के पथ पर चलो, सफलता और समाज दोनों आपके साथ होंगे।

साथियों, यह दो मुंह वाली बीजेपी सरकार किसान और कमेरे को काटती है और सीमा पर बैठे जवान को भी। एक समय वह था जब स्व लाल बहादुर शास्त्री जी के समय आज़ाद भारत में नारा बुलन्द हुआ था जय जवान, जय किसान। इस नारे ने वास्तव में आज़ाद भारत को एक सूत्र में पिरो दिया था। कमेरा, किसान, मज़दूर और जवान सभी आज़ाद भारत को एक करने में, उन्नति की दिशा की तरफ सकारात्मक दृष्टि अपनाये निरन्तर अपने दम पर आगे बढ़ने लगे थे। भारत एक बार फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो रहा था। हरियाणा प्रदेश की स्थापना की नींव रखी जा चुकी थी। हरित क्रांति के सूत्रपात किसान अपनी मेहनत से हौंसले से भी ज्यादा अन्न पैदा करने लगा था। इससे पहले खेती एक व्यवसाय बनती कांग्रेस अपनी असलियत पर आने लग चुकी थी। साठ वर्षों तक गरीबी हटाने के नाम पर वोट मांगती आयी कांग्रेस को पूरा देश नकार चूका है। इसी बीच मोदी जी ने उन्ही नारों को दोहराते हुए, कांग्रेस के साठ वर्षों का हवाला देते हुए विकास के नाम पर कुछ अहम वायदे किये और सत्ता हथियाने में सफल रहे। सत्ता सुख भोगते ही उन्हें वह वायदे अब जुमले लगने लगे हैं। किसान खेत में पसीना बहाता है फिर अपने अधिकार मांगने दफ्तरों के थानों के चक्कर काटने पर मज़बूर है। कमेरे, दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को जेलों के नाम पर डराया जा रहा है। मात्र दो ही वर्षों में बीजेपी ने अपनी करनी से देश भर में गूंजने वाले गगनभेदी जय जवान, जय किसान के नारों को “गए जवान, गए किसान” बना कर रख दिया है। जिस व्यवस्था में जवान के खून की कीमत और किसान, मज़दूर के पसीने का हक, नौजवान के सपनो का मूल भुला दिया जाये, वह अंहकारी दम्भी शासन जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। यही आज हम सब का परम् कर्तव्य है।

जय हिन्द। जय कमेरा। जय जवान। जय किसान।

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