Way ahead now after Indian Army’s Surgical Strike

rsdhull राजनैतिक विश्लेष्ण Leave a Comment

कल दिन में प्रेस कोंफ्रेंस कर भारतीय सेना ने भारत के हर एक नागरिक को गौरवमई क्षणों का एहसास दिलाया. बताया गया कि एक इंटेलीजेंस इनपुट पर भारत की सीमा में घुसने का इंतज़ार कर रहे कई आतंकियों को मार गिराया गया है. उडी हमले के बाद बदहवास सा महसूस कर रहा भारत का जनमानस एक दम से जिन्दा हो गया. अपनी धरती का बारम्बार आतंक के लिए इस्तेमाल कर भारत को कमजोर करने की लड़ाई लड़ रहे पाकिस्तान के लिए यह बड़ा झटका था. पर भारत के ठीक विपरीत वहां पर रिएक्शन अजीब प्रकार के आये. जहाँ आर्मी ने सर्जिकल स्ट्राइक को सिरे से नकार दिया तो वहीँ नवाज शरीफ ने इस घटनाक्रम की निंदा की. इस माहौल पर सरकार को घेरते हुए इमरान खान ने कहा कि कारगिल लड़ाई के बाद पाकिस्तान ने अपने मृत सैनिकों को पहचानने से ही इनकार कर दिया था; इनके ऊपर विश्वास कैसे हो? पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबार dawn के अनुसार तो सर्जिकल स्ट्राइक हुई ही नहीं. पाकिस्तान सीमा में घुसे एक भारतीय सैनिक को पाकिस्तान की सेना ने पकड़ लिया था उसे छुड़वाना इस समय सामयिक जरूरत है. इस खबर को भारतीय अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स ने भी कन्फर्म किया है. पाकिस्तान के अनुसार फायरिंग में कई भारतीय सैनिक हताहत हुए हैं. पढ़ें खबर को. DGMO की कोंफ्रेंस के तुरंत बाद भारत सरकार ने 22 देशों के प्रतिनिधियों को बुला कर हमले की जानकारी दी और साथ में कहा कि यह युद्ध नहीं है. हमने छोटी स्ट्राइक की है और इसे आगे जारी रखने का कोई इरादा नहीं है. पाकिस्तान का कहना है इस मामले को लेकर वे सेक्युरिटी काउन्सिल जायेंगे. इसका मतलब साफ़ है; यह हमला ठीक पाकिस्तान के दिमाग पर हुआ है. इसके लिए भारतीय सेना बधाई की पात्र हैं.

क्या होती हैं सर्जिकल स्ट्राइक?

केंब्रिज डिक्शनरी के मुताबिक़ सर्जिकल स्ट्राइक एक सैन्य हमला होता है जो किसी ठिकाने पर किया गया हो. सर्जिकल शब्द मेडिकल के सर्जरी शब्द से आया है. सर्जिकल स्ट्राइक में छोटे हथियारों का प्रयोग किया जाता है.

सर्जिकल स्ट्राइक का सबसे मशहूर उदाहरण शायद पाकिस्तान के ऐबटाबाद में चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर हमला था.
सोसाइटी फ़ॉर पॉलिसी स्टडीज़ के डॉयरेक्टर कॉमोडोर उदय भास्कर के मुताबिक़ सर्जिकल स्ट्राइक करने वाला पक्ष अपने उद्देश्य, वक़्त और जगह को सीमांकित करता है और इसमें ताक़त का नियंत्रित तरीक़े से इस्तेमाल किया जाता है.
वो कहते हैं, “सर्जिकल स्ट्राइक दूसरे पक्ष के लिए संदेश है कि ऐसा करने वाले का मक़सद काफ़ी परिभाषित और छोटा है. ऐसा नहीं है कि भारत ने पहली बार सर्जिकल स्ट्राइक की हैं. ये पहले भी हुआ है. लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर दोनो पक्ष सीमित उद्देश्य के लिए सर्जिकल स्ट्राइक करते हैं और जब वो ख़त्म हो जाता है तो दूसरे पक्ष को संदेश मिल जाता है.”
रिटायर्ड मेजर जनरल इयान कार्डोज़ो कहते हैं, “जंग का एक उसूल होता है जिसे मेन्टेनेन्स ऑफ़ मोमेंटम कहते हैं यानी कार्रवाई करते रहने की ज़रुरत होती है.”
वो दावा करते हैं कि अभी पाकिस्तान ऑफ़ बैलेंस है इसलिए मोमेंटम बनाए रखने की ज़रुरत है.
कार्डोज़ो कहते हैं, “किसी भी सर्जिकल स्ट्राइक को प्लान करना होता हैं कि अगर दुश्मन कुछ कार्रवाई कर सकता है तो उसे पहले से भांप कर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी जाए. तभी इसका असर होता है”

ऐसा नहीं कि भारत ने यह पहली बार किया हो. सर्जिकल स्ट्राइक का इतिहास हमें 1965 तक ले जाता है. इससे पहले कन्फर्म 11 बार सर्जिकल स्ट्राइक्स हो चुकी हैं. इन्हें पब्लिक किया जाना 2015 में प्रारंभ किया गया. इस बार पब्लिक करना भारत ने इसलिए अच्छा समझा क्योंकि विश्व मंच पर लगातार कमजोर बन रही छवि को तोडना आवश्यक था. इससे पहले डिप्लोमेटिक फ्रंट पर भारत को बड़ा झटका तब लगा था जब भारत के अनुरोध के बावजूद भी रूसी सेना पाकिस्तान सेना के साथ युद्धाभ्यास के लिए पहली बार पाकिस्तान में उतरी थी. जहाँ सार्क समिट के अंदर जाने के लिए मना करने के बाद तीन और देशों ने पाकिस्तान जाने से मना कर दिया; वहीँ नेपाल फिर भी इसे अटैंड करने पर उतारू है. पर भारत, अफगानिस्तान, भूटान और बंगला देश के मना करने के बाद यह होगी इसपर संदेह जताया जा सकता है. यह एक बढ़िया खबर है.  इस समय चौतरफा तौर पर पाकिस्तान को घेरे जाना आवश्यक है. यही कारण है कि कल सर्वदलीय बैठक में भारत के सभी दलों ने भारत सरकार का साथ दिया और सरकार के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई.

अब आगे क्या?

आगे बलूचिस्तान के मुद्दे को जोर शोर से उठाने की आवश्यकता है. पाकिस्तान के कश्मीर स्टैंड को ढीला करने के लिए बलूचिस्तान अब भारत की विदेश नीति का हिस्सा होना चाहिए. हालाँकि अमेरिका ने स्पष्ट रूप से बलूचिस्तान मुद्दे से अपने को अलग कर लिया है और कहा है कि वह पाकिस्तान की अखंडता का समर्थन करता है. ऐसा US State Department के आधिकारिक प्रवक्ता जोन किरी के माध्यम से कहा गया है. अफगानिस्तान का बेहतर इस्तेमाल, सेना को अधिक बल, बलूचिस्तान के मुद्दे को उछालने के अलावा आवश्यक है कि भारत रूस का विश्वास वापिस हासिल करे क्योंकि रूस की सीमा अमेरिका की अपेक्षा काफी नजदीक पड़ती है और रूस का भारत की तरफ होना पाकिस्तान के लिए दबाव की स्थिति बनाता रहेगा. फिलहाल भारत सरकार की गतिविधियाँ अमेरिका के पक्ष में अधिक दिख रही हैं; इस पोजीशन को बदलना आवश्यक है.

अंत में भारत सरकार के साथ मजबूती से खड़े होने की प्रतिबद्धता दोहराने के साथ ही मैं इस सामयिक सर्जिकल स्ट्राइक की भारतीय सेना को बधाई देता हूँ और विश्वास जताता हूँ कि इनेलो इस समय पूरी तरह भारत सरकार के साथ खड़ी है. हम किसी भी जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं. पर इसके साथ ही भारतीय मीडिया को बेहद संजीदगी से इस मुद्दे को हेंडल करे क्योंकि मीडिया की बचकानी रिपोर्टिंग इस समय विदेशों में भारतीय मीडिया और सरकार की हंसाई का कारण बन रही है.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *