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rsdhull निजी विचार Leave a Comment

आज मेरे जन्मदिन पर मिले हजारों मेसेज से अनुगृहित हूँ. मेरा हमेशा से मानना है कि व्यक्ति को हर दिन नव जीवन की तरह ही जीना चाहिए. यही कारण है कि मेरा मानना है कि इंसान को हर दिन कुछ नया पढना चाहिए, लिखना चाहिए और सोचना एवं करना चाहिए. एक पुरानी कहावत है, “कुछ लिख के सो, कुछ पढ़ के सो, जिस जगह से तू उठा था, उस जगह से बढ़ के सो”. अपने जीवन के अन्दर शायद ही कोई दिन ऐसा रहा हो जिस दिन कुछ नया न सीखा हो अथवा किया हो. यदि ऐसा दिन रहा है तो उस दिन की मेरे जीवन में कोई कीमत नहीं. मेरा मानना है कि यदि जीवन के कोई भी दो दिन एक जैसे रहे हैं तो मैंने उन दो दिनों में से एक को व्यर्थ कर दिया. जीवन व्यर्थ करने के लिए नहीं; अपितु आगे बढ़ने के लिए है. नव चुनौती स्वीकार करने के लिए है. सभी मित्रों का दिया प्रेम एवं विश्वास वह नव चुनौती लेकर आया है जिस पर आगे बढ़ना मेरा कर्तव्य है. इस चुनौती को मैं स्वीकार करता हूँ एवं वचन बद्ध होता हूँ कि विश्वास, प्रेम पर खरे उतरने का हर सम्भव प्रयास करूंगा. सभी बधाई संदेशों को मैंने अपने मनसा में बिठा लिया है; इस विश्वास को कर्म में परिवर्तित करने के लिए मैं प्रयासरत होता हूँ. आप सबको राजनैतिक कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रतिबद्ध हूँ.

आप सबका धन्यवाद.

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