कृषि एवं सिंचाई के क्षेत्र में हरियाणा भाजपा सरकार के दो वर्ष

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सरकार का सबसे बड़ा वायदा था स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना; पर उस बारे में सरकार इस समय चुप्पी साध चुकी है. जहाँ सरकार आने से पहले भाजपा के नेता अर्धनग्न हो प्रदर्शन करते थे वहीं सरकार आने के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में एफिडेविट फ़ाइल किया कि यह लागू नहीं की जा रही है. हरियाणा में लगभग आधे जिले पानी की भारी किल्लत से गुजर रहे हैं; बावजूद इसके सरकार के द्वारा सुप्रीमकोर्ट में एफिडेविट फ़ाइल कर कहा गया कि हरियाणा में कोई सूखा नहीं है. मेरे विधानसभा क्षेत्र के 73 गाँवों में से लगभग 50 में पीने का पानी नहीं है और यहाँ सरकार बड़ी बड़ी बातें कर रही है.

शिक्षा, वित्त, स्वास्थ्य एवं बिजली के बाद अब कृषि एवं सिंचाई क्षेत्र की चर्चा अति आवश्यक है. हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है. यहाँ की लगभग 70% जनसँख्या कहीं  न कहीं कृषि के ऊपर निर्भर है अतः इसे अति आवश्यक विषय माना जाए.

कृषि क्षेत्र:

कृषि क्षेत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी घोषणा स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने की थी. लेकिन सरकार बनने के बाद भाजपा इससे बिलकुल पलट गयी. केंद्र सरकार ने तो सुप्रीमकोर्ट में एफिडेविट तक दे दिया कि वह रिपोर्ट लागू करने में अक्षम है. भाजपा सरकार के द्वारा दो बड़े कथित दावे किये जाते हैं; पहला है फसल मुआवजा और दूसरा दावा है प्रधानमन्त्री फसल बीमा योजना. सरकार का कहना है कि एतिहासिक रूप से सबसे अधिक मुआवजा पिछले दो वर्ष के दौरान दिया गया. दो वर्ष में मुआवजे के रूप में हरियाणा सरकार लगभग 2100 करोड़ बांटे गये हैं. इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की जानी चाहिए. जितना नुक्सान हुआ उसकी भरपाई तो सरकार को करनी ही थी. पिछले कुछ वर्षों में नुक्सान लगातार बढ़ता जा रहा है; अतः सरकार की जिम्मेदारी भी बढ़ रही है. मुआवजे को लेकर पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान किसानों की बेइज्जती की गयी. बहुत से जिलों में दो, तीन रूपये तक के भी चैक दिए गये. ऐसा नहीं कि इस सरकार के दौरान ऐसा नहीं किया गया. बस इस बार मुआवजे के चैक बढ़ कर बीस पच्चीस रूपये तक जा पंहुचे. लेकिन दिक्कत आती है घोटाले से. इस बार मुआवजा बांटने में बहुत भारी स्तर पर घोटाला हुआ है. जहाँ असली नुक्सान झेलने वाले किसान अभी भी मुआवजे के इंतज़ार में हैं वहीँ ऐसे लोग जिन्होंने अधिकारीयों के साथ मिली भगत की उन्हें नुक्सान न होने के बावजूद भी मुआवजा बांटा गया. मेरे गृह क्षेत्र जुलाना के लगभग दस गाँवों में इस भारी घोटाले के कागज मेरे पास मौजूद हैं. इसके ऊपर विजिलेंस में केस डालने की तैयार चल रही है. सीधे शब्दों में मानें तो भले ही 2100 करोड़ का मुआवजा बांटा गया; लेकिन वह मुआवजा सही हाथों में न पंहुच कर गैरकानूनी तरीके से बहुत से अपात्रों की जेब में जा पंहुचा. कैथल जिले के कई किसान भी इस समय न्याय की गुहार लगाने के लिए कोर्ट में हैं. दूसरा बड़ा दावा अर्थात किसान फसल बीमा योजना को लेकर मैंने एक बहुत बड़ा लेख लिख इस योजना की कमियां आप सब तक पंहुचाने का कार्य किया था. आप उसे यहाँ पढ़ सकते हैं. इस योजना के द्वारा सरकार ने गैरकानूनी तरीके से किसानों के खातों से बीमा का प्रीमियम काट लिया; इसका व्यापक विरोध चला और इनेलो ने इस मामले में बड़े आन्दोलन की घोषणा कर दी है. इस योजना के विरोध के बाद इसे राजनैतिक बता सरकार के द्वारा खारिज किया गया. लेकिन मुआवजा बांटने के नाम पर अब इस बीमा योजना की असलियत सामने आ रही है. रतिया के बाद गोहाना में सैंकड़ों एकड़ जमीन में मुआवजे के लिए कम्पनी मना कर चुकी है. जींद में इस समय काला हूपर की बिमारी सर उठा रही है. इस बिमारी से लगभग जिले की फसल बर्बादी की कगार पर है; लेकिन बीमा कम्पनी मुआवजे के लिए मना कर चुकी है. कम्पनी का कहना है कि काला हूपर की बिमारी को फसल बीमा में शामिल नहीं किया गया है. क्या इन किसानों की सरकार कोई मदद करेगी?

अगली समस्या जो कृषि क्षेत्र में दिक्कत दे रही है वह है धान घोटाला. धान की खरीद में लगातार दूसरे वर्ष घोटाला हुआ है. जहाँ धान की MSP बेहद कम है वहीँ जो पैसा दिया जा रहा है वह इस MSP से लगभग दो सौ रूपये कम है; इस बारे में अक्टूबर के दुसरे सप्ताह में बहुत प्रदर्शन हुए थे; मुख्यमंत्री के OSD ने करनाल मंडी में ऐसी खरीद को पकड़ा तो वहीँ खुद मुख्यमंत्री के सामने पर्चियां पेश की गयी जिनमें रेट MSP का था लेकिन किसानों को कम पैसे दिए गये. इस मामले में जब मुख्यमंत्री से पूछा गया तो वो कोई जवाब नहीं दे पाए. इसके अतिरिक्त नमी की अधिकता का बहाना लगा कर फसल को नहीं खरीदा जा रहा; लिंक पढ़े: ( 1, 2). इनेलो ने अतिरिक्त नमी के नाम पर किये घोटाले को भी उजागर किया था. नमी मापने की मशीन में गडबडी कर किसानों को जान बूझ कर लाभ से वंचित रखा जा रहा है. दुखद बात यह है कि सरकार मिलर्स के साथ मिल कर इस घोटाले को मानने से भी इनकार कर रही है. इनेलो का आरोप है कि भाजपा विधायक कुलवंत बाजीगर इस घोटाले में सीधे मिले हुए हैं और उनपर कार्यवाही होनी चाहिए. धान के मामले में तो स्थिति इतनी खराब है कि प्रति क्विंटल जहाँ फसल को लगाने का खर्च 2000 रूपये से अधिक है; वहीँ MSP इससे पांच सौ रूपये कम है और जो पैसे दिए जा रहे वे 1300 रूपये की रेंज में है. इसके अतिरिक्त लगभग यही हाल गन्ने की फसल का है. गन्ने की फसल की दिक्कत यह है कि जितनी देर यह फसल खेत में खड़ी रहेगी इसकी उपज घटती जाएगी. शुगरकेन बोर्ड मीटिंग कर इसकी खरीद का निर्धारण नहीं कर पा रहा है. पिछले दो वर्ष में शुगरकेन बोर्ड की तरफ से इस खरीद के लिए कोई आदेश नहीं जारी किये गये. इनेलो की मांग है इसका भाव कम से कम 400 रूपये रख इसकी खरीद तुरंत प्रारंभ की जाए ताकि किसानों को बचाया जा सके. मूंग के ऊपर इस बार MSP रखा गया है लेकिन हिसार से दुर्भाग्यपूर्ण खबर आने में दो दिन भी नहीं लगे. वहां इसे MSP से लगभग 2000 रूपये कम भाव पर खरीदा जा रहा है; यह सीधी लूट है. अधिकतर जगह मूंग को खरीदा ही नहीं जा रहा है. यही हाल बाजरे का है; उसे भी MSP से काफी कम कीमत पर खरीदा जा रहा है जबकि पर्चियां सब मामलों में MSP की ही कट रही हैं. अक्टूबर का माह समाप्त होने को है; लेकिन गेंहूं का बीज अभी भी सरकार उपलब्ध नहीं करवा पा रही है. ज्ञातव्य है कि गेंहूं की बिजाई अक्टूबर के अंदर प्रारंभ हो जाती है. इस देरी का नतीजा अप्रेल में कटाई के समय भुगतना पड़ेगा. आखिर क्यों सरकार कृषि व्यवसाय को खत्म करने में उतारू है?

सिंचाई

सिंचाई विभाग पहले ओम प्रकाश धनखड़ जी के पास था जिसे मुख्यमंत्री ने अपने पास ले लिया है. सिंचाई में सरकार के दावे कितने खोखले हैं इस बात का पता SYL नहर के मामले में भाजपा के स्टैंड से पता चल जाता है. जहाँ पंजाब भाजपा SYL के पानी को हरियाणा में लाने के मामले में विरोध कर रही है वहीँ हरियाणा भाजपा ने केवल विरोध जताया है; इसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं किया गया है. हांसी बुटाना नहर जो हुड्डा सरकार के शासन काल का एक बड़ा घोटाला था; भाजपा ने उसे शुरू कराने की बात की थी; लेकिन न घोटाले की जांच ही शुरू हुई है और न ही इसे शुरू करने की तरफ कोई कदम उठाया गया है. हरियाणा के रजबाहों से गाद की सफाई हुए दो वर्ष हो गये हैं; जिसके कारण नहरों और रजबाहों में पानी सुचारू रूप से नहीं आ रहा है. इसका पता हरियाणा के किसी भी कौने से किया जा सकता है. सेल्फी विद टेल की योजना भी हवाई साबित हुई. दिक्कत यह है कि जहाँ गाद की सफाई नहीं हुई वहीँ कागजों के अनुसार समस्त हरियाणा में यह सफाई समाप्त हो चुकी है; इस सफाई में सैंकड़ों करोड़ का खर्चा किया जा चुका है. गाद यों की यों है; मतलब साफ़ है. इस मामले में कोई बड़ा घोटाला अंजाम दिया गया है. इसकी जांच अति आवश्यक है. पर सरकार तो इमानदारी की भांग पी कर सो रही है; तो सफाई कौन करेगा?

भाजपा सरकार से मेरा सीधा सवाल है; हरियाणा की कृषि को बरबाद कर कौनसे किसान हित की बात सरकार करने लायक है यह बताये.

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