कासगंज की सच्चाई पड़ेगी इस देश पर भारी

rsdhull मुद्दे 4 Comments

उत्तर प्रदेश के कासगंज कस्बे में हुई सांप्रदायिक हिंसा ने फिर से इस देश को प्रमुख मुद्दों से हटा कर हिन्दू बनाम मुसलमान पर मोड़ दिया है. पद्मावत मामले में जातीय एवं धार्मिक हिंसा फैलाने में नाकाम कट्टरपंथी लगता है कि इस मामले में कुछ हासिल कर गये हैं. हमेशा की तरह हिंसा के पीछे कोई और नहीं अपितु संघ है. इससे पहले गुडगाँव में भी संघ के गुर्गों ने स्कूल बस पर पथराव मामले को हिन्दू बनाम मुस्लिम बनाने का प्रयास किया था; पर जल्द ही गुडगाँव पुलिस की आधिकारिक स्टेटमेंट ने इनका खेल खराब कर दिया. ऐसे में अलगे ही दिन 26 जनवरी को इन कथित देशभक्तों ने अपनी देशभक्ति का ढोंग प्रदर्शित करने के लिए कासगंज चुना; जहाँ बड़े ध्यान से प्लानिंग के साथ हिंसा फैलाई गयी. पुख्ता जानकारी के अनुसार स्टोरी इस तरह है:

कासगंज के जिस इलाके में हिन्दू एवं मुस्लिमों के बीच झड़प हुई वहां पर मुस्लिम ग्रुप 26 जनवरी को मनाने के लिए एवं तिरंगा फहराने के लिए सडक पर कुर्सियां लगा रहे थे. इतने में संघी अपने चिर परिचित अंदाज में वहां पर पंहुचे.

ज्ञातव्य है किअनाधिकृत मोटरसाइकिल पर निकली तिरंगा यात्रा कासगंज के बद्दू नगर पहुंची, जिसने बाद में साम्प्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया था। एक स्थानीय निवासी के मुताबिक, मोटरसाइकिल पर रैली कर रहे लोगों ने कुर्सी हटाने के लिए कहा ताकि वे वहां से निकल सके।

वकील और स्थानीय निवासी मोहम्मज मुनाज़ीर रफी ने कहा “वे नारे लगा रहे थे। हमने उनसे आग्रह किया कि पहले हमारा गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम खत्म होने दें लेकिन वे अपनी बात पर अड़े रहे और वहां से नहीं हटे।” रफी ने कहा “मैंने गणतंत्र दिवस मनाने के लिए 200 रुपए का अपनी तरफ से योगदान दिया था। मैं सुबह घर से कासगंज कोर्ट के लिए निकल गया था जहां पर तिरंगा फहराने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जब मैं वापस आया तो हमारे स्थानीय इलाके में लोग गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के लिए कुर्सी लगा रहे थे। इसी दौरान अचानक 50-60 लोगों का एक ग्रुप बाइक पर वहां पहुंचा और कुर्सी हटाने के लिए कहने लगा।

रफी ने कहा “हमने उनसे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा लेकिन उन्होंने मना कर दिया। वहां कई लोग इकट्ठे हो गए और धक्का-मुक्की भी हुई। इसके बाद वे लोग अपनी बाइक लेकर वहां से निकल गए। मैंने कासगंज पुलिस को फोन किया और उन्हें घटना की जानकारी दी। इसी प्रकार की एक रैली पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित की गई थी लेकिन उस समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था। हम देशभक्त हैं लेकिन अभी हमें देशद्रोहियों की तरह प्रदर्शित किया जा रहा है।”

कासगंज एडिशनल एसपी पवित्र मोहन त्रिपाठी के अनुसार, पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग कराया था। उन्होंने कहा बाइक सवार लोग फिर से एक जगह इकट्ठा हुए और तेहसील रोड के चक्कर लगाने लगे। वहां एक अन्य मुस्लिम बहुल इलाके के लोगों ने सोचा कि वे लोग प्रतिशोध की भावना से वहां चक्कर लगा रहे हैं। यहीं से हिंसा की शुरुआत हुई, जिसमें गोली लगने के कारण 28 साल के एक युवक की जान चली गई।” इस मामले पर बात करते हुए आईजीपी ध्रुव कांत ठाकुर ने कहा ” जिस समय यह घटना हुई उस वक्त मुस्लिम समुदाय के लोग तिरंगा फहराने ही वाले थे।” इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जहां पर करीब 60 लोगों का एक ग्रुप हाथ में तिरंगा और भगवा रंग का झंडा लिए चिल्ला रहे थे कि “बाइक तो यहीं से जाएगी।” रिफरेन्स जनसत्ता

गजब की बात यह है कि जहाँ घटनाक्रम में एक निर्दोष युवक (हिन्दू) की जान गयी तो दूसरी और एक युवक घायल(मुस्लिम) है. स्पष्ट है कि हिंसा दोनों तरफ से हुई. जानकारी के मुताबकि मुस्लिमों ने मोटरसाइकल सवारों को अपने प्रोग्राम में आने का न्यौता दिया जहाँ पर तिरंगा फहराया जाना था; लेकिन उन्होंने वहां पर बैठने से मना कर दिया और कहा कि मोटरसाईकिल वहीँ से जायेंगे और कुर्सियों को हटाया जाये. लेकिन ऐसा ना किया जाने पर मोटरसाइकल सवारों ने वन्दे मातरम के नारे लगाये. जवाब में मुस्लिमों की तरफ से हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए. जवाब में मोटरसाइकल सवारों ने संघी नारे लगाए शुरू किये”इस देश में रहना होगा तो वन्दे मातरम कहना होगा”; यह कहा गया कि जो वन्दे मातरम नहीं कहेगा वह पाकिस्तान चला जाये. संघियों की जान बसती है पाकिस्तान में; ये लोग पाकिस्तान का नाम ले लेकर 70 साल से रोटियां खा रहे हैं. ये भूल जाते हैं कि अलग हिन्दू राष्ट्र का प्रस्ताव इनके द्वारा ही पास कराया गया था जिसके बाद इनकी सगी बहन मुस्लिम लीग ने अलग मुस्लिम राष्ट्र का नारा बुलंद किया. ये लोग आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने की जगह अपने कथित अंदरूनी दुश्मनों के विरुद्ध लड़ने की बातें करते थे(मुस्लिम) लेकिन फिर कथित देशहित में मुस्लिम लीग के साथ मिल बंगाल में सरकार भी बनाई; ठीक ऐसे ही जैसे पीडीपी के साथ इस समय कश्मीर में सरकार बना काम चला रहे हैं और उसे खूब गालियाँ देते हैं. तिरंगा फहराने का उत्सव इस इलाके में हर साल होता है; इस साल महान शहीद अब्दुल हामिद के नाम पर उत्सव हो रहा था जो गाजीपुर से ही थे और जंग में वीरता के लिए जिन्हें परमवीर चक्र दिया गया था. कासगंज में इन दोगलों का स्लोगन था,” हिंदी, हिन्दू, हिन्दुस्तान, कुत्ते भागो पाकिस्तान” एक लडके ने एक मुस्लिम बुजुर्ग के मूंह पर थप्पड़ भी जड़ दिया. प्रत्यक्ष घटनाक्रम देखने वालों के अनुसार मोटरसाइकल सवारों ने मुस्लिमों को भगवा झंडा फहराने के लिए कहा; जिसके लिए वहां मुस्लिमों ने मना कर दिया. इसके बाद हिंसा भडकी और जो हुआ सबके सामने है. पाकिस्तान जिंदाबाद का कोई नारा किसी के द्वारा वहां पर नहीं लगाया गया; इसके विपरीत हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारों के बहुतेरे सबूत मौजूद हैं. आईजीपी ध्रुव कान्त ठाकुर के अनुसार जब यहाँ घटनाक्रम हुआ उस समय मुस्लिम तिरंगा फहराने ही वाले थे. कासगंज में दंगा तिरंगे या भारत माता के नारों को लेकर नहीं बल्कि “मुल्लों का एक ही स्थान-पाकिस्तान या कब्रस्तान” तथा “हिन्दोस्तान में रहना होगा तो जय श्रीराम कहना होगा” जैसे नारे थे। इसमें एक मुसलमान को पकड़ कर जबरदस्ती “जय श्री राम” के नारे लगाने के लिए पीटा भी गया जिसका विरोध करने पर दंगा हुया। यह जुलूस वीएचपी और एबीवीपी द्वारा निकाला जा रहा था। वह तो वीडियो  ने स्थिति साफ़ की वरना तो ये गुंडे फिर से अपना प्रोपोगेन्डा सेट कर जाते.

यह बहुत खतरनाक है और एक प्रकार से कहें तो कटिबद्ध रूप से भारत को हिंसा और गृहयुद्द के मुहाने पर झोंकने की तयारी है जहाँ किसी को लाशों के अलावा कुछ नहीं मिलेगा. इस प्रकार का आर्टिकल लिखने के बाद ये गुंडे मुझे भी मुल्ला और ना जाने क्या क्या कहेंगे; लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश के प्रति अपने फर्ज को भूल मैं इन मूर्खों की बात पर ध्यान दूं. राहत इन्दौरी साहब का एक शेर याद करा रहा हूँ, “सभी का खून शामिल है इस देश की माटी में; किसी के बाप का यह हिन्दुस्तान थोड़ी है.” याद करा दूं कि देश के गृहमत्री के सुपुत्र भी इस मामले में अपने प्रोपोगेन्डा को सेट कर रहे हैं.

इनपुट्स: 1, 2, 3,वरिष्ट पत्रकार अमरेश मिश्र जी, 4 एवं अन्य ज्ञात स्रोत. हमें यह सोचना एवं  समझना होगा कि आखिर कौन बिगाड़ रहा है देश का माहौल?

Comments 4

  1. Aapki soch ko slaam
    Jai hind

    Kuch nich logo ko aam jnta ke khoon se khelna kaam h inka
    Mere desh ke dusmn h rss or ye gamdi soch wale log

    1. Post
      Author
  2. बहुत ही बढ़िया सच्चाई लिखी है भाई साहब आपने

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