Government claims of corruption free recruitment false

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भ्रष्टाचार मुक्त नियुक्तियों के सरकार के दावे झूठ

चंडीगढ़, दिनांक 30 सितम्बर 2018, इनेलो प्रदेश प्रवक्ता रविन्द्र सिंह ढुल ने यहाँ जारी अपने ब्यान में कहा कि हरियाणा सरकार कथित पारदर्शी नियुक्तियों के नाम पर झूठ का ढोल पीट रही है. जहाँ हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमिशन के कर्मचारियों पर दर्ज की गयी FIR में SIT ने चेयरमैन, सेक्रेट्री अथवा किसी भी मेम्बर से पूछताछ नहीं की और ना ही ओएमआर की अथवा बायोमेट्रिक डेटा की जांच नहीं की; वहीं दूसरी और एक एक कर अपने चहेतों को नौकरी बाँट उन्हें एडजस्ट करने का काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि उन्होंने इससे पहले भिवानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी और फिर बाद में होम्योपैथिक काउन्सिल के रजिस्ट्रार की भर्ती में भारी धांधली का खुलासा किया था और उम्मीदवारों के नाम भी मीडिया के माध्यम से हरियाणा की जनता को दिए थे. बाद में उन ही लोगों की नियुक्ति की गयी जिन लोगों के नाम उन्होंने मीडिया को बताने का काम किया था. इस ही कड़ी में हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमिशन, पंचकुला के मेम्बर की नियुक्ति आती है. इनेलो प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सरकार के द्वारा 15 अगस्त 2018 को सदस्य की नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति निकाली गयी थी; जिसमें फार्म भरने की अंतिम तारीख 05 सितम्बर 2018 थी. भर्ती के लिए कुल 35 लोगों ने अप्लाई किया जिसमें ज्यूडिशियल ऑफिसर से लेकर वकील भी शामिल थे. नोटिस केवल 21 दिन का दिया गया. इसमें तर्क यह दिया गया था कि चूंकि भर्ती ज्यादा बड़ी नहीं है अतः थोडा समय दिया जाना गलत नहीं. दस्तावेजों की जांच के दौरान जब यह देखा गया कि सरकार के चहेते ने अभी तक अप्लाई ही नहीं किया तो 20 सितम्बर 2018 को आखिरी तारीख को बढ़ा कर 27 सितम्बर कर दिया गया. मुख्यमंत्री के करनाल से सम्बन्ध रखने वाले और फिलहाल हरियाणा महाधिवक्ता दफ्तर में कार्यरत उस अधिवक्ता ने इस दौरान अप्लाई करने का काम किया. अब उन्हें गुपचुप नियुक्ति दे दी जाएगी. इनेलो प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि ईमानदारी का ढोंग पीट रही सरकार जिस प्रकार गुपचुप अपने लोगों को एडजस्ट करने का काम कर रही है; उससे उनकी कथित ईमानदारी का ढकोसला खुल जाता है. उन्होंने याद करवाते हुए कहा कि चाइल्ड वेलफेयर काउन्सिल की भर्ती में भी व्यापक धांधली हुई है जहाँ सभी के सभी ऐसे अभियार्थियों को एडजस्ट किया है जो अधिकारीयों के रिश्तेदार हैं. ठीक ऐसे ही टूरिज्म विभाग में भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और साथ ही मत्स्य विभाग की धांधली को सरकार ने स्वयं मामला कोर्ट पंहुचने के बाद स्वीकार किया है. ढुल ने कहा कि चूंकि वर्तमान नियुक्ति में करनाल के एक व्यक्ति को एडजस्ट करने का प्रयास किया जा रहा है ऐसे में मुख्यमंत्री की कथित ईमानदारी पर गम्भीर संदेह होता है. उन्होंने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में दावा किया था कि ठेके पर कर्मचारी लगाने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी; जबकि यह एक ऐसी सरकार बन कर रह गयी है जो टाउन प्लानर जैसी सीनियर पोस्ट पर भी आउटसोर्सिंग के कर्मचारी लगाने का काम कर रही है. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी से पूछा जाना चाहिए कि उसके वायदे का क्या हुआ जिसमें वे पारदर्शिता का ढोल पीटते थे.

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Government claims of corruption free recruitment false

Chandigarh: Dated 30th September 2018, State Spokesperson INLD Ravinder Singh Dhull in a statement issued here said that Haryana Government is making false claims of corruption free recruitments. On the one hand in a criminal case registered against the employees of Haryana Staff Selection Commission; no investigation was done regarding role of Chairman, Secretary or Members of the Commission nor the OMR or Biometric Data was examined; on the other hand near and dears are being favoured by giving them posts of their choice. He said that just like he exposed corruption and bungling in recruitments in Central University Bhiwani and thereafter in Homeopathic Council and the name of selected candidates were intimated to the media prior to declaration of result. Likewise, the recruitment of Member in Haryana Electricity Regulatory Commission comes. INLD State Spokesperson said that Government had issued advertisement on 15.08.2018 for recruitment of member and last date of application was decided as 05th September 2018. Around 35 persons applied for the post during prescribed time which included Judicial Officers and Advocates. Notice regarding application was of only 21 days. At that time it was stated that since the recruitment is not big; longer time is not required. At the time of scrutiny of documents when it was seen that the favourite has not applied for the post; the last date was extended to 27th September 2018 vide notice dated 20th September 2018. During this time one officer who belongs to Karnal District from where Chief Minister is elected and who is presently working in the office of Advocate General, Haryana applied for the post. Now, he will be appointed on the post.  INLD State Spokesperson said that the way alleged honest Government is adjusting its workers silently; their propaganda of alleged honesty is exposed. He reminded that big corruption has been done in recruitments in Child Welfare Council wherein relatives of few officers have been adjusted. Similarly, there is corruption in recruitment relating to Tourism Department and the corruption in the recruitments relating to Fisheries department was admitted by the Government itself after the matter reached to Court. Dhull further stated that at time when a person from Karnal is being adjusted; the alleged claims of honesty of Haryana CM goes in veins. He said that BJP claimed in the party manifesto that the policy regarding outsourcing of employees shall be re-examined after BJP comes in power; whereas the present Government is first Government who has appointed persons on outsourcing on senior posts like Town Planners.  So, it is required to be asked from Bhartiya Janta Party that what has happened to their claim relating to honesty and transparency?

 

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