My Political Ideology

मेरी राजनीति कैसे होगी?

भारत में राजनीति में वर्ग चेतना का एक बड़ा स्थान है. फलां धर्म, फलां जाति अथवा फलां समुदाय! यहाँ धर्म, जाति, क्षेत्र के नाम पर बंटवारा बहुत आसान है; यही कारण है कि राजनीति को आसान करने के लिए सबको बांटा जाता है एवं क्षेत्रवार अपनी सहूलियत के अनुसार उनका उपयोग किया जाता है. इस कारण समग्र रूप से राष्ट्र का अहित होता है एवं वर्ग चेतना की वजह से कहीं न कहीं भेदभाव को बढ़ावा मिलता है. ऐसी स्थिति में मुझे स्वयम की वर्ग चेतना से ऊपर उठ कार्य करना होगा. इसे हम वर्ग मुक्ति का नाम दे सकते हैं. वर्ग मुक्ति का अर्थ यह नहीं कि हम वर्ग के प्रति उदासीन हो जाएँ जैसे कम्युनिस्ट हो जाते हैं. वर्ग मुक्ति का अर्थ यह है कि हम यह भूल कर कार्य करें कि फलां मनुष्य फलां वर्ग का है. इसका सीधे शब्दों में मानें तो यह अर्थ है कि व्यक्ति अपनी जाति और अपनी श्रेणी की प्राथमिकताओं को छोड़ समाज के विभिन्न वर्गों की समग्र स्थिति को सुधारने का प्रयास करे. लेकिन इसमें ध्यान रहे कि किसी वर्ग विशेष का अहित न हो; लेकिन समाज का हित अवश्य हो. इसे सरल भाषा में समझें तो मैं जिस समुदाय से सम्बन्ध रखता हूँ तो मैं जो कार्य करूँ वे समग्र समाज के हित में हो लेकिन उससे मेरे समुदाय का अहित भी न हो. इसे आदर्श स्थिति में राजनीति कहा जा सकता है. हाँ एक वर्गीकरण करना समाज के हित में अवश्य है. समाज के अंदर व्यापक असमानता के कारण एक वर्ग ऐसा अवश्य है जो दबा कुचला रहगया है. वह है कमेरा वर्ग जिसमें किसान, मजदूर और दलित आते हैं. ये वे लोग हैं जो भुजबल से कार्य कर रोजी रोटी का संकलन करते हैं. असमान योजनाओं का सबसे बड़ा खामियाजा उस वर्ग को उठाना पड़ा है. मेरा प्रयास इस ही वर्ग के लिए कार्य करने का है. संकीर्ण वर्गों की राजनीति से उभारना और समाज की असल चेतना को उजागर करना मेरा कर्तव्य है. जैसा कि मैंने बताया कि वर्ग मुक्त होने की पहली शर्त यह है कि धर्म और सम्प्रदाय को मैं अपना निजी मामला बना ही न सकूं. हमें यह कार्य इस प्रकार करना होगा कि सभी वर्गों का भला हो और वृहद रूप से कमेरे वर्ग को दबी कुचली स्थिति से उभार कर मुख्य धारा में लाया जा सके. धर्म, जाति आदि कार्य करने का अथवा दूरी बनाने का कोई कारण हो ही नहीं सकता. राजनीति के अंदर मेरा कार्य एवं ध्येय केवल मात्र कमेरे के लिए कार्य करना है. भारत गाँवों में बस्ता है और इन गाँवों से और ग्रामीण वर्ग से मुझे घनिष्ठ प्रेम एवं लगाव है. यही लगाव मेरा राजनीति में आने का कारण है और इसके लिए कार्य करना मेरा उद्देश्य है. इस समय धर्म के अलावा जातिवादी राजनीति भी देश में जहर घोल रही है. मेरा अखंड विश्वास है कि कमेरों की कोई जाति नहीं होती. चूंकि मेरा संघर्ष कमेरों के लिए है अतः स्वयम को मैं किसी भी जातिवादी प्रकार की राजनीति से दूर रखता हूँ. सभी वर्गों का समुचित प्रतिनिधित्व एवं सभी का एक समान विकास ही मेरा ध्येय है. राजनैतिक रूप से मैं स्वयम को दीनबंधु सर छोटू राम, मेरे दादा चौधरी दल सिंह, जननायक चौधरी देवी लाल, चौधरी चरण सिंह, लोकनायक जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर के करीब पाता हूँ. मैं सम्पूर्ण धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखता हूँ. मेरा मानना है कि राज्य एवं राजनैतिक दलों को किसी भी प्रकार स्वयम को धर्म एवं कर्मकांडों से दूर रखना चाहिए. भारत के संविधान के अनुसार भी यह आवश्यक है. अतः मैं स्वयम को किसी भी धार्मिक आयोजन से दूर रखता हूँ. धर्म के मामले पर मैं पूर्ण रूप से निष्पक्ष हूँ. विकास के मामले में मेरा मानना है कि सबसे पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास आवश्यक है; इसके बाद ही अन्य विकास की सम्भावना बनती है. भारत जहाँ एक और अभी तक रोटी, कपडा और मकान की मूल भूत समस्याओं से जूझ रहा है; बहुतेरे ग्रामीण इलाके में आज भी बिजली और पानी नहीं है; वहां इस प्रकार की समस्याओं का हल किये बिना उद्योग आदि का होना अथवा न होना बेमानी है.