भारतवर्ष में 21 दिन का लॉकडाउन अब लगभग डेढ़ हफ्ते का रह गया है। इस समय के दौरान हमे काफी कुछ सीखने को मिला है और काफी कुछ अभी सीखना बाकि है। इस लॉकडाउन को आगे बढ़ाया जाए या नहीं यह सरकार अपने सही समय पर तय करेगी, लेकिन एक बात निश्चित है वह यह कि यह लॉकडाउन आगे बढ़ेगा अथवा नहीं यह हमारे जनमानस की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा। पिछले दो तीन दिनों में कुछ ऐसे भी मामले सामने आये हैं जिन्होंने सरकार की कोरोना वायरस से लड़ने की इच्छाशक्ति को भी कहीं न कहीं झटका देने का काम किया है। धर्म के नाम पर इकट्ठा होना, सरकारी आदेशों को न मानना, जबरदस्ती करने पर आपराधिक कार्य करना , यह सब हमें पिछले डेढ़ सप्ताह के लॉकडाउन में पता लगा है। मेरा भारत के ग्रामीण जनमानस से विशेष लगाव है और वे ही सबसे अधिक इस मामले में पीड़ित भी हो सकते हैं। सही मायने में कहें तो कोरोना वायरस अमीरों की दी हुई वो बीमारी है जिसको स्वाभाविक तौर पर गरीब जनता भुगत रही है जो कि न तो साधन सम्पन्न है और न ही उनके पास ऐसा कोई जुगाड़ है कि वे समय रहते न केवल इस बीमारी को चैक करवा लें अपितु वे एक ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं जहाँ पर उन्हें न केवल भारतवर्ष का पेट भरने के लिए अन्न , सब्जी एवं दूध आदि की सप्लाई सुनिश्चित करनी है बल्कि दूसरी ओर स्वयं को इस खतरनाक महामारी से भी बचाना है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के पास इस बीमारी की जानकारी भी बहुत कम है और इससे बचने की सुविधाएं भी कम हैं। इसके अलावा वहां अन्धविश्वास का भी एक बहुत लम्बा चौड़ा नेटवर्क मौजूद है जो कि उन्हें सही समय पर सही निर्णय लेने से रोकने पर उतारू है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र को आने वाला डेढ़ सप्ताह बेहद सावधानी से बिताना है। मैं पिछले दस दिनों की गतिविधियों को देख ग्रामीण क्षेत्र के लिए निम्न सावधानियां बता रहा हूँ, आशा है हमारे भाई इन पर गौर करेंगे:

  1. आने व जाने के रास्तों को न खोदें: हरियाणा में ऐसा देखने में आया है कि कुछ जगह पर ग्रामीणों ने गाँव में आने जाने के सभी रास्ते कृषि उपकरणों से खोद दिए हैं , जिसके कारण उनके गाँव से बाहर जाने का अथवा अंदर आने का रास्ता बिलकुल बंद हो गया है। ऐसा बिलकुल भी न करें क्योंकि गाँव में एमरजेंसी मेडिकल सुविधाएँ, प्रशासन का आना जाना, ग्राम के कामगारों को बाहर आने जाने का रास्ता बिलकुल उपलब्ध नहीं रहेगा। यह ग्रामीणों के लिए सही नहीं क्योंकि ऐसे में दूध, सब्जियां बेचने वाले भाई भी बाहर आने जाने से वंचित रह सकते हैं। यह गलत है और इसे तुरंत रोकें।
  2. किसी भी बाहरी व्यक्ति की सूचना तुरंत दें : गाँव में रह रहे किसी भी बाहरी व्यक्ति की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और उससे किसी भी हाल में सम्पर्क में आने से बचें। स्वयं गाँव के बाहर पहरा लगाएं और अपने रिश्तेदारों को भी न आने के लिए सूचित करें। चूंकि अधिकतर संदेश पंचायतों के माध्यम से पंहुचाये जा रहे हैं ऐसे में पंचायत की सभी बातों का अक्षरतः पालन करें। यदि पंचायत सही कार्य नहीं कर रही है तो सरकार को जिला पंचायत अधिकारी की मार्फत सूचना दें।
  3. बिना बात घर से न निकलें : आपके लिए प्रधानमंत्री ने लक्ष्मण रेखा खींची है और इसे बिना जरूरत कतई भी पार न करें। यहां तक कि अपने स्वयं के मोहल्ले ,गोहाण्ड में जाने से बचें। ऐसा वायरस की कड़ी को तोड़ने के लिए अत्यंत आवश्यक है। अब अगले दस दिनों तक वायरस का संक्रमण भारत में बिलकुल ऊंचे स्तर पर रहेगा अतः बाहर आने जाने से बिलकुल बचें।
  4. लगातार अपने हाथों को धोते रहें: हर आधे घंटे में अच्छे साबुन से अपने हाथ कम से कम तीस सैकिंड तक धोएं और उसके बाद सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें।
  5. घर से बाहर निकलने के बाद घर में आते ही अपने कपड़े बदलें: यह अत्यंत आवश्यक है कि यदि आप किसी काम से भी बाहर जाते हैं तो वापिस आते ही आप अपने कपड़ों को निकाल कर बाहर ही रख दें और नहा कर नए कपड़े अवश्य पहनें। घर से बाहर जाने के बाद पहने हुए कपड़े किसी भी हाल में दोबारा न पहने और उन्हें धो कर ही दोबारा प्रयोग करें। घर में पहनने की चप्पल अथवा जूते अलग रखें और उन्हें घर के बाहरी क्षेत्र में ही रहने दें।
  6. दस वर्ष से कम के बच्चे और 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्ग बाहर न निकलें : विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह बीमारी कम उम्र के बच्चों एवं बड़ी उम्र के बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है अथवा कमजोर होती है और बड़ी उम्र के बुजुर्ग अक्सर किसी न किसी बीमारी से पहले ही पीड़ित होते हैं, ऐसे में उनका बाहर निकलना उनके लिए घटक सिद्ध हो सकता है।
  7. बीमारी के लक्षण आने पर बिन डॉक्टर को बताए कोई दवा न लें : यह अत्यंत आवश्यक है कि बीमारी के लक्षण आने पर आप स्वयं का इलाज न करें और निकटतम स्वास्थय केंद्र पर जाकर ही अपना इलाज करवाएं। स्वयं वैद्य बनने की गलती घटक सिद्ध हो सकती है और यह केवल आप पर नहीं , अपितु आपके गाँव के अन्य लोगों पर भी भारी पड़ सकती है।
  8. तम्बाकू एवं शराब से बचें: जितना हो सकता है तम्बाकू एवं शराब से बचें क्योंकि इन दोनों से रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। यदि आप हुक्के के आदि हैं तो भी उससे दूर रहें और किसी भी हाल में हुक्का एक दूसरे से शेयर न करें। हालाँकि हरियाणा में हुक्का एक दूसरे को न देना गलत माना जाता है फिर भी इस बात को ध्यान में रखें कि हुक्के से भी यह संक्रमण बेहद आसानी से फैलेगा।
  9. ताश से बचें: ये बात आप पहले ही जानते हैं लेकिन किसी भी हाल में इकट्ठा होकर ताश से बचें। अपने परिवार के साथ समय बिताएं और बाहर किसी के भी सम्पर्क में आने से बचें।
  10. कटाई के समय ध्यान रखें : फसल कटाई के समय ध्यान रखें कि आपके उपकरणों को कोई और न छुए। इस दौरान उचित दूरी बनाए रखें।
  11. खाने में अधिक से अधिक लस्सी, निम्बू आदि को शामिल करें और देरी से पचने वाली चीजों से दूर रहें। समय पर खाएं और समय पर सो जाएं।
  12. देसी विधियों का इस्तेमाल करते रहें : देसी दवाई जैसे गिलोय, हल्दी , आंवला आदि का उपयोग करते रहें। ऐसा करने से आपका संक्रमण के बाद इलाज नहीं होगा लेकिन आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती रहेगी।
  13. अफवाहों पर ध्यान न दें : विभिन्न माध्यमों से चल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार आवश्यक जानकारियां दिन में कई कई बार अलग अलग माध्यमों से भिजवा रही है। केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें और बिन बात की बातों को तवज्जो न दें। व्हाट्सएप्प पर आई जानकारी बिन जाने आगे न भेजें और जल्दी से उस पर भरोसा न करें।

आपकी जान कीमती है और देश को आपकी जरूरत है। अपनी जान को एवं दूसरों की जान को खतरे में न डालें। कोई भी दिक्क्त होने पर आप सरकारी माध्यमों से सम्पर्क करें। यदि कहीं आपकी जानकारी अधूरी है अथवा खबर की सच्चाई जाननी है तो आप दिन में चौबीसों घंटे में कभी भी फोन करने में न हिचकिचाएं।

आपका हितैषी
रविंद्र सिंह ढुल
अतिरिक्त महाधिवक्ता, हरियाणा सरकार

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