गांधी की कलम सेः

  1. “…..भारत को इंगलैण्ड और अमरीका के जैसा बनाने का मतलब है ऐसे नए देशों की तलाश करना जिनका शोषण किया जा सके । अभी तक तो लगता है कि पश्चिमी राष्ट्रों ने योरोप के बाहर के देशों का , शोषण के लिए , आपस में बंटवारा कर लिया है और तलाश किए जाने के लिए कोई देश नहीं बचे हैं । भारत द्वारा पश्चिम की अंधी नकल करने के प्रयास का क्या हश्र हो सकता है ? निश्चय ही पश्चिम में औद्योगीकरण और शोषण का बाहुल्य रहा है । जब जो लोग इस रोग से ग्रसित हैं वही इसका निदान नहीं कर सके हैं तो हम जैसे अनाड़ी इनसे बच सकने की आशा कैसे कर सकते हैं ?”….. यंग इण्डिया, 7-10-1927, पृष्ट (348) (अंग्रेजी से)
  2. ” ईश्वर न करे कि भारत में भी कभी पश्चिम जैसा औद्योगीकरण हो । एक छोटे टापू – देश ( इंगलैण्ड ) के आर्थिक साम्राज्यवाद ने ही सारे विश्व को बेड़ियों में जकड़ दिया है । अगर तीस करोड़ की जनसंख्या वाला पूरा राष्ट्र इस प्रकार के आर्थिक शोषण की राह पर चले तो वह सारे विश्व को चूस कर सुखा देगा । ” यंग इण्डिया , 20-122-1928, पृष्ट 422.
  3. ” पंडित नेहरू चाहते हैं कि औद्योगीकरण हो क्योंकि वह समझते हैं कि अगर इसका सामाजीकरण कर दिया जाए तो यह पूंजीवादी विकारों से मुक्त हो सकता है । मेरा अपना ख्याल है कि ये विकार औद्योगीकरण का ही हिस्सा हैं और किसी भी सीमा तक किया हुआ सामाजीकरण इनको समाप्त नहीं कर सकता । हरिजन , 29-9-1940,पृष्ट 299.