मेरे मित्र कमलजीत एक प्रबुद्ध चिंतक एवं लेखक हैं, उन्हें पढ़ना अपने आप में एक सीख होता है। कोरोना की वजह से समस्त विश्व में चीन के प्रति एक गुस्सा है और उस गुस्से का कारण मुख्यतयः यह है कि यह वायरस चीन से फैला है। इस मामले में कमलजीत जी का सोचना बिलकुल अलग है और मैं उनसे पूरी सहमति रखता हूँ। इसलिए मैं उनके लिखे को यों का यों नीचे डाल रहा हूँ।

चीन में जब व्हाट्सएप्प पहुंचा तो उन्होंने उसे क्रिटीकली एनालाइज किया और तय किया कि यह एक बहुत बड़ी संभावना है जिससे सरकार एक एक नागरिक के साथ संवाद कर सकती है।

चीन की सरकार ने अपने नागरिकों को We Chat नाम से एक मोबाइल एप्प बना कर दिया। जिससे एक एक नागरिक से संवाद करना आसान हो गया। सरकार एक एक।नागरिक को सीधे इंस्ट्रक्शन दे सकने की स्थिति में आ गयी।

चीन जा चुके लोग बताते हैं कि करोड़ों CCTV कैमरे चीन में।शहरों की सड़कों पर लगाए हैं जिनमे फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर काम करते हैं कोई कहीं भी आ जा रहा है ऑथोरोटीज़ की जानकारी में रहता है।

We Chat मोबाइल एप्प में बैंकिंग की भी सुविधा सरकार ने बना कर दी है ताकि सभी नागरिकों का एक ही एप्प से काम चल जाए औरौथोरिटीज को यह भी मालूम रहता है कि कौन क्या खरीद रहा है कहाँ से।

पिछले दिनों एक बड़ा सवाल उठा की करोना वायरस 800 किलोमीटर चल कर बीजिंग और शंघाई नही पहुँच पाया लेकिन पंद्रह हजार किलोमीटर चल कर इटली पहुंच गया।

अब परतें खुल रही हैं कि कैसे We Chat मोबाइल एप्प में डेटा माइनिंग करके यूजर्स के स्टेटस रेड येलो और ग्रीन कर दिए गए।

जिस भी बन्दे का स्टेटस येलो हो गया तो उसको मैसेज आ गया कि भाई भीतर बड़ ले और 14 दिन के लिए बाहर न दिख जाइयो।

जिसके अंदर सिम्पटम्स आ गए उसका स्टेटस मेडिकल में पहुंचते ही रेड हो गया और पिछले 28 दिन में वो जहां जहां था जिन जिन से मिला था उनके स्टेटस अपने आप येलो होते चले गए।

जिनमे लक्षण नही उभरे उनके स्टेटस अपने आप ग्रीन हो गए।

अपने यहां सत्तर सौ तो एप्प हैं, बैंकों वाली एप्प को छोड़ कर चलती एक भी नही। हमने अनेक बार यह बात सुनी है कि सरकार व्हाट्स एप्प के तरले करती घूमती है कि भाई डाटा दे दे डेटा दे दे ,उसके नाटक ही खत्म नही होते।

“निजता का ख्याल” भाई आम इंसान जो कानून की पालना करना चाहता है और अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार को देकर सुरक्षित समझना चाहता है उसको कोई चिंता नही है के मेरी जानकारी सरकार के पास जा रही है।

अपितु वह खुद को एम्पॉवर्ड मसहूस करेगा कि मेरा सीधा संवाद सरकार के साथ चल रहा है।

दूसरी तरफ जो कुलंग है,जिसके मन मे ठगी ठोरी की स्कीमें चलती हैं, जो टैक्स नही भरना चाहता,जिसने डाके मारने हैं, जो नैतिक रूप से पतित वाले सिस्टम में चल कर समाजद्रोही बन कर जीना चाहता है उसको अपनी निजता का बहुत ख़य्याल रहता है और फिर वो संविधान के प्रावधानों की आड़ में प्रपंच करता है।

मरकज़ी करोना बम हों या शोभायात्रा के वाले संभावित बम, या लॉक डाउन तोड़ने वाले उन्मादी सब के सब रोके जा सकते थे यदि भारत में भी सूचना क्रान्ति का कोई स्याना उपक्रम पहले से सोच कर चलती।

इसीलिए चीन से सीख कर यहां भी कुछ न कुछ इम्पलीमेंट करना परम आवश्यक है और सभी विभागों और आम जन को एक ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद रह कर काम करना होगा उससे अनुशासन अपने आप कायम हो जाएगा।

फिर न कोई जातीय हिंसा भड़केगी और न कोई प्रोपोगेंडा चला पायेएगा, पुलिस और क्राइम इन्वेस्टीगेशन का काम और भी आसान हो जाएगा।

इसीलिए सीखो सीखो और बस सीखो और कुछ ठोस करो अन्यथा नई गुलामी के लिये तैयार हो जाओ।