किस्सा-बीजा सोरठ-इकहरा-

रस बिन इश्क, इश्क बिन आशिक, आशिक बिन संसार नहीं।
गुण बिना लाज, लाज बिन मतलब, बिन मतलब के प्यार नहीं।।

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1. धन बिन दान, दान बिन दाता, दाता बिन जग सूना है,
सत बिन पुरूष, पुरूष बिन त्रिया, त्रिया बिन घर सूना है,
रण बिन सूरे, सूरे बिन तेगा, तेगा बिन कर सूना है,
तक बिन कर्म कर्म बिन किस्मत, किस्मत बिन नर सूना है,
हर बिना हार, हार बिना हानि, हानि बिन हुशियार नहीं।
गुण बिना लाज, लाज बिन मतलब, बिन मतलब के प्यार नहीं।।

2. शशि बिना रैन रैन बिन तारे बिन गगन सूना सै,
गुल बिना रात रात बिन बुलबुल बुलबुल बिन बन सूना सै,
रंग बिन रूप बिन जोबन, जोबन बिन तन सूना सै,
मोह बिना मेहर, मेहर बिना ममता, ममता बिन मन सूना सै,
कहे बिन हुक्म हुक्म बिन हाकिम हाकिम बिन हकदार नहीं।
गुण बिना लाज, लाज बिन मतलब, बिन मतलब के प्यार नहीं।।

3. मन बिन मेल मेल बिन प्यार, प्यारे बिन दो बात नहीं,
जर बिना थाट थाट बिन जारी, जारी बिन उत्पात नहीं,
प्रजा बिन देश देश बिन कातिल, कातिल नहीं अपघात नहीं,
त्रिया रहै सजन की गेलां, बिछु़ड़े पाछे साथ नहीं,
दुःख बिन दर्द दर्द बिना दुःखिया, दुखिःया बिन फटकार नहीं।
गुण बिना लाज, लाज बिन मतलब, बिन मतलब के प्यार नहीं।।

4. लोभ बिन लोभी, लोभी बिन क्रोधी, क्रोध बिना अपमान नहीं,
गुण बिन कद्र कद्र बिन शोभा, शोभा बिन सम्मान नहीं,
भाव बिन भगत, भगत बिन भगती, भगति बिना कल्याण नहीं,
सुर बिन साज साज बिन गाणा, गाणे बिन तुक तान नहीं,
गुरू बिन ज्ञान, ज्ञान बिन मेहरसिंह, गाने का अधिकार नहीं।

गुण बिना लाज, लाज बिन मतलब, बिन मतलब के प्यार नहीं।।
रस बिन इश्क, इश्क बिन आशिक, आशिक बिन संसार नहीं।
गुण बिना लाज, लाज बिन मतलब, बिन मतलब के प्यार नहीं।।