धर्म

मैं और मेरा धर्म!

rsdhull निजी विचार Leave a Comment

पत्थर पूजे हरी मिले ,तो मैं पुजू पहार…. ताते यह चक्की भली ,पीस खाए संसार …. !! कंकर-पत्थर जोरी कर लई मस्जिद बनाये. ता पर चढ़ी मुल्ला बांग दे,क्या बहरा हुआ खुदाय…!!-संत कबीर स्वतंत्रता को ध्येय मानकर चलने में एक समस्या यह है कि समाज के जकड़े हुए लोग बार बार आकर आपका प्रतिरोध करना चाहते हैं। उन्हें उस जकड़न …

किसान का धर्म

rsdhull निजी विचार Leave a Comment

“हर खेत को पानी, हर हाथ को काम, हर तन को कपड़ा, हर सर को मकान, हर पेट को रोटी, बाकि बात खोटी” जननायक चौधरी देवी लाल जी के ये अमर वाक्य भारत में राजधर्म की असली मिसाल और पहचान है. आजादी के बाद भारत ने स्वयम को धर्मनिरपेक्ष, पंथनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में स्थापित किया. इसके बहुत से कारणों …

धर्म एवं राजनीति

rsdhull निजी विचार Leave a Comment

भारत का संविधान हमें स्वतंत्रता का मूल अधिकार देता है। संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार, “किसी व्यक्ति को उसके प्राण अथवा दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।“ इस मूल अधिकार को माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने बहुत से निर्णयों में अति महत्त्वपूर्ण माना है एवं समय समय पर सरकार को …