Punjab & Haryana High Court, Chandigarh
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आह देखो यह राह मैंने ही बनाई थी

इस राह पर माटी मैंने ही बिछाई थी
इस माटी से तुमने एक मूरत बनाई थी

इस मूरत से निकल
तुम आज उस नए राह पर चले गए

जिस राह पर न मेरी माटी है
न मेरा अक्स

पर अपना ध्यान रखना

देखना बिन माटी के अक्सर
पैरों में कंकड़ चल जाते हैं।

गर कंकड़ चले और राह असम्भव लगे तो आ जाना
मेरी राह पर माटी बिछी है

मैं नहीं मिलूंगा पर वह माटी तुम्हें ले जायेगी।

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