Punjab & Haryana High Court, Chandigarh

गर तुम होते पास

तो श्वासों को पहचान मिलती
तो अधरों की वह प्यास बुझती
तो जीवन को नव पहचान मिलती
आते जब तुम मेरे पास
तो इक नव गीत मैं गुनगुनाता
मेरी नयी पहचान बनाता

लेट जाता उस गोद में
जिस गोद में बसता जीवन है
सहलाता उन केशों को
कर चक्षु को बंद जब स्वप्न लोक आता
तो सोचता ऐ प्रिये
के तुम होती तो जीवन ऐसा कटता
के जैसे चलता नदिया में जल है
के चलती जैसे धरती पर पवन है।

आओ नव इतिहास बनाएं
लगा पंख अपने ऊपर
किसी दुनिया में उड़ जाएँ।

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