पास खडा था भ्रष्टाचार
सुबह उठ कर आँख खुली तो पास खडा था भ्रष्टाचार, अट्टहास लगाता हुआ, प्रश्न चिह्न लगाता हुआ. जब पूछा…
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सुबह उठ कर आँख खुली तो पास खडा था भ्रष्टाचार, अट्टहास लगाता हुआ, प्रश्न चिह्न लगाता हुआ. जब पूछा…
Read Moreरूचीनां वैचित्र्य अदृजुकुटिलनानापथजुषां. नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसमर्णाव इव. (शिव महिम्नः स्तोत्र, ७ ) अर्थात हे शिव, जिस प्रकार विभिन्न नदियाँ विभिन्न पर्वतों…
Read Moreकानून की देवी तेरी जय जय कार, छाया जब हर जगह अन्धकार, राजा करता हो जनता पर अत्याचार, ले हाथ…
Read Moreएक कथा प्रस्तुत कर रहा हूँ, ये मुझे एक परम मित्र ने पिछले दिनों सुनाई थी. एक सेठ था जो…
Read Moreमैं खड़ा हूँ, मेरा अंतर्द्वंद मुझे जीने न दे रहा है, जब सारा भारत खड़ा है तो मैं क्यों सो…
Read Moreमेरी जाति “आम आदमी” है. सड़क पर फटे हाल एक पुरुष को खड़ा देख,नेता जी रुके, उनसे पूछा, तुम कौन…
Read Moreमैं क्यों खड़ा हूँ? भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन में आम आदमी क्यों खड़ा रहा? यह प्रश्न अब आम हो गया…
Read Moreएक आम आदमी का गुनाह!! सड़क पर चलते एक आम आदमी को पुलिस ने पकड़ लिया. यह छोटी सी कविता…
Read MoreUNIFORM CIVIL CODE India always has been a country with a lot of diversities. Right from the Vedic period there…
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