Punjab & Haryana High Court, Chandigarh
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Personal Writings Aug 15, 2012

एक बेरोजगार

इस किनारे चलते हुए चुन्नी  लाल  ने  बहती नदिया के पार देखा. इस किनारे बड़े बंगले थे, बड़े बाजार थे, उन बाजारों में…

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Uncategorized Jan 07, 2012

तलाश

इक आह सी दिल में उठती है, इक दर्द जिगर में उठता है, हम रात में उठके रोते हैं, जब…

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Uncategorized Dec 24, 2011

धर्मनिरपेक्षता

रूचीनां वैचित्र्य अदृजुकुटिलनानापथजुषां. नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसमर्णाव इव. (शिव महिम्नः स्तोत्र, ७ ) अर्थात हे शिव, जिस प्रकार विभिन्न नदियाँ विभिन्न पर्वतों…

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